दूधसागर
दूधसागर भारत का एकमात्र झरना है, जो दो राज्यों की सीमा
पर स्थित है। गोवा-कर्नाटक बॉर्डर से मंडोवी नदी गुजरती है, जिस पर दूधसागर
झरना स्थित है। पणजी से इसकी दूरी लगभग 60 किमी है। यहां मानसून के दौरान
पर्यटकों का हुजूम उमड़ता है। दूधसागर झरने को "मिल्क ऑफ सी' भी कहा जाता
है। हर कोई एक बार यहां जाने की जरूर इच्छा रखता है। इस मनमोहक झरने की और खास बातें।
झरने से बहती है दूध जैसी धार
दूधसागर भारत का एकमात्र झरना हैं, जो दो राज्यों की सीमा पर स्थित हैं। गोवा - कर्णाटक बॉर्डर से मंडोवी नदी गुजरती हैं , जिस पर दूधसागर झरना स्थित हैं। यह सड़क मार्ग से पणजी से ६० किलोमीटर दूर हैं और मडगाओं - बेलगाम रेल मार्ग पर मडगाओं से ४६ किलोमीटर पूर्व में स्थित हैं। दूधसागर जलप्रपात भारत के सबसे ऊंचे झरनो में से एक हैं इसकी ऊंचाई ३१० मीटर और औसत चैड़ाई ३० मीटर के बीच हैं। दूध सागर झरने के सामने से रेलवे लाइन भी गुजरती है।
यह जलप्रपात पश्चिमी घाट के फॉल्स भगवान महावीर अभयारण्य और मोलेम से राष्ट्रीय उद्यान के बीच स्थित हैं। यह झरना कर्नाटक और गोवा राज्यों के बीच सीमा रेखा का काम करता हैं प्राणपति जंगलो से घिरा हुआ हैं। जो मानसून के मौसम में जब इसमें पानी की अधिकता हो जाती हैं तब यह बहुत ही भव्य और मनोहारी दिखाई देता हैं।
यह स्थान फिल्मकारों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं। चेन्नई एक्सप्रेस के कुछ दृश्य यहाँ फिल्माए गए हैं. मानसून के बाद यहां जाना ठीक रहता है।
गोवा जाने के लिए देश के सभी बड़े शहरों से फ्लाइट और ट्रेन की सुविधा
उपलब्ध है। पणजी से टैक्सी द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है। दूधसागर झरने तक पहुंचने का मार्ग भगवान महावीर वन्यजीव अभ्यारण्य से हो कर जाता हैं जिसमे हरे भरे जंगल और कलकल बह रही नदियों का नैसर्गिक दृश्य अत्यंत मनमोहक होता हैं।
यहाँ जंगलो में आप को विभिन्न पशु पक्षियों की प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं जो व्यक्ति इसमें रूचि रखते हैं उनके लिए यह स्वर्ग के समान हैं दूधसागर ईको एवं वाइल्ड लैफे रिसोर्ट जिनमे सबसे प्रसिद्द हैं। 







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